*सीधी में बदला मौसम,

*सीधी में बदला मौसम, खेतों में कहर,दरीमाडोल, भदौरा और शंकरपुर खोखरा कतरवार में ओलावृष्टि,आंधी से फसलें चौपट, किसानों की बढ़ी चिंता*

राजबहोर यादव

 

एमपी के सीधी जिले के ग्रामीण अंचलों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरीमाडोल, भदौरा और शंकरपुर खोखला कतरवार गांवों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि और झोंकेदार हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। जहा महज एक घंटे तक चली इस तेज बरसात ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया और किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

वही ग्रामीणों के अनुसार, ओलों की मार से रबी की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। सरसों की फलियां टूटकर खेतों में बिखर गईं, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका है। मटर की बालियां तेज हवा और ओलावृष्टि के कारण जमीन पर गिर गईं, जो नमी के कारण सड़ने की कगार पर हैं। चने की फसल में भी झड़ाव और पौधों के झुकने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का डर सताने लगा है।

 

स्थानीय शंकरपुर निवासी किसान उमेश द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में बड़े भरोसे के साथ खेती की थी, लेकिन अचानक आए मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा, “सरसों और चने की फसल अच्छी स्थिति में थी, मगर ओलों और तेज हवाओं ने सब बिगाड़ दिया। मटर की फसल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब लागत निकालना भी मुश्किल दिख रहा है।” उमेश द्विवेदी ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर राहत दिलाने की मांग की है।

 

आम के बागानों में भी नुकसान की खबरें हैं। ओलावृष्टि और तेज हवा के चलते पेड़ों पर लगे छोटे फल (गौर) झड़ गए, जिससे आगामी सीजन में आम की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। बागान मालिकों का कहना है कि इस समय फल झड़ना सीधा उत्पादन पर असर डालता है।

 

वही कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि फसलों के लिए बेहद नुकसानदेह होती है, खासकर तब जब फसल पकने या फल बनने की अवस्था में हो। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही रुख जारी रहा, तो व्यापक नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

जहा मौसम की इस मार के बाद प्रभावित गांवों में चिंता का माहौल है। किसान अब प्रशासन और कृषि विभाग की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, ताकि नुकसान का आकलन कर समय पर सहायता मिल सके और अगली बुवाई के लिए संबल प्राप्त हो।

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